बुधवार, 13 मई 2020

आज कलमले

आज कलमले पनि साथ दिदैन भन्छन
मैले लेखेको लेखको भाग मिल्दैन भन्छन
शायद यहीं भएर होला
आज नियति,संगति र मनले 
पनि साथ दिदैन भन्छन
हे प्रभु!
के मेरो आकांग्क्षा,इक्षा र मनको अधुरोपन
सपना,विपना र एक्लोपन अधुरो हुन्छ ?
मैले तिमि प्रति दिएको,देखाएको र दर्शाएको
मान,सम्मान र स्वाभिमान अपुरो हुन्छ ?
तिमीले नदिएको जवाफ ,
मनमा बार-बार प्रश्न गर्छन 
यो समाज़ यो सभ्यता तिमीलाई असत्य भन्छन
शायद यहीं भएर होला,
आज विस्वास अंधविश्वासको साथी बनी 
घुम्दैछ भन्छन.....
           
                            ✍️©अभिजीत आनंद


मंगलवार, 12 मई 2020

काश तिम्रो समानता

काश तिम्रो असमानता
तिम्रो समानताको डोरिमा 
बाँधेको भये प्रभु
सायद यो संसार तिमीलाई 
पक्षपाती भन्थिएन होला
भेदभाव को पराकाष्ठा र उपमा
दिन्थियेन होला
हे देव !
मलाई थाहा छ
केहि न केहि कतै न कतै
सायद यसमा पनि तिम्रो कुनै खेला होला
हामीलाई सताउने हामीलाई अल्झाउने 
यो असमान समाजिकताबाट
 हामीलाई बिउझाउने
तिम्रै लीला होला...

                               लेखक
                       अभिजीत आनन्द

बुधवार, 20 जून 2018

ज़िन्दगी


 ज़िन्दगी तुझसे शिकायत नहीं
अजनवी हूँ ,किसीका इनायत नहीं
में खुश हु तेरी इन बनावटों से
चल रहा हूँ इस भीड़ वीरानों में
एक कमी किसीका इमायत नहीं ...
मुझे तेरी ज़िन्दगी से
कभी सिकवा था , ना गिला
बस एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ तुझसे ?
क्या लिखे हो मेरे ज़िन्दगी के ,
वो अंतिम क्षण में ?
खैर ! में ठहरा मामूली इन्शान
मुझसे तुझसे शिकायत नहीं
अन्ज़ान हूँ ...अन्ज़ान ही बना रहूँगा
में खुश हूँ तेरी इन बनावटों से
चल रहा हूँ .........
                                                                              कुमार अभिजीत आनंद 

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

नारी

करब मान सम्मान नारी के
कैह-कैह करै छि पाप
जाहि कोख सँ जनम लेलौं
बनेलौं ताहि के श्राप......
करै छि नारी के सम्मान.........
करै छि नारी के..........
झूठा वादा झूठा इरादा
फसेलौं कही-कही क नयाँ रीत
भावना के नरम गाथा गा कs
बनलौं आँहा पतित
कहै छि,
करै छि नारी के सम्मान
करै छि नारी के.........
वाह रे दुनियाँ ढोंगी पाखण्डी
देखलियौ तोरो कहानी
रामायण आ महाभारत के सुनलियौ
तोरो कहानी...
नारी के तू सम्मान करै छें
विवाह कs छोड़बै छे घर परिवार
चाहि उल्टे सोना टिकिया
चाही पलंग केवार
करै छे नारी के सम्मान..
करै छे नारी के........
                
                   【बाँकी भाग दोशर दिन】
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                  ©  कुमार अभिजीत आनंद......
    
                     

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

मुझे पता है एक दिन...

मुझे पता है एक दिन समझ जाओगे
क्या होता है दुत्कारना
जब बितेगा तुम पर
आशा है , तुम भी संभल जाओगे....
कहते हैं लोग चाँद इतना खूबसूरत क्यों है ?
इतना खूबसूरत होने के बाद भी
उसमे दाग़ क्यों है...?
मुझे नही पता ये सब
में तो बस् इतना जानता हूँ की
चाँद में दाग़ है फिर भी
लोग उसी को चाहते हैं
उसीको झुक के शज़दा करते हैं
उशी से प्यार करते हैं....
तुम्हारी ये दुत्कार को भि क़द्र किया है मैंने
इतना कुछ होंने के वावजूद भी शब्र किया है मैंने
अब मुझे नही पता कि ये सब क्यों कर रहा हूँ
किस लिए कर रहा हूँ
ज़िंदा लाश हुँ , क्यों हूँ नहीँ पता
पर इतना ज़रूर जनता हूँ ...
खुद को ईश ज़मीं पर किशि के लिये...
कब्र किया है मैने.....…
                                   लेखक,
                       ©कुमार अभिजीत आनंद

आज़ फिर से....

आज फिर से याद आइ वो
मेरे मनको बेचैन बना गई वो
सामने थी, साथ बैठी थी
बातें कि...मुस्कुराये हम
जब स्पर्श करना चाहा
फिर वही हुवा जो होता आया है...
आखिर क्यों ?
क्यों तुम मेरे साथ ही ऐसा करती हो
शांत मनमे बेचैनी और चञ्चलता बढ़ाती हो
आखिर क्यों ?
में कुछ नही जानता
जो लोग सोचते है,
वो में कुछ नही मानता....
फिर क्यों ?
क्या मेरा क्यों का जवाब क्यों में ही रहेगा
या जिस् वज़ूद को में ढूंढ़ रहा हु
वो तुम ही हो.......
                              गध् कविता संग्रह
                                     लेखक,
                         ©कुमार अभिजीत आनंद
                              

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

प्रभु ! आपको लगता होगा..

प्रभु!
आपको लगता होगा
में कविता में क्या लिखता रहता हूँ
क्या कहूँ.....…
हर वक़्त आपको...बस् आपको
पैगाम लिखता रहता हूँ....
आप सोचते होंगे तुम पागल तो नहीँ ?
हाँ प्रभु !
में पागल हि तो हूँ,
दुनियाँ का ठोकर खाया हुवा घायल हि तो हूँ.....
आपको पाने के लिए हि
में ये सब बोलता रहता हूँ
आपको रिझाने के लिए हि
में आपको कोशता रहता हूँ.......

                            लेखक,
                  कुमार अभिजीत आनंद
                    ©अभिजीत चौधरी
               

क्या तू सच मे हे

क्या तू सचमें है
तेरा वज़ूद भी है या बस्
एक बहम है..अंधविस्वास है इंसानों का......
अभितक बस् सुनते ही आया हूँ
की तुहि सबकुछ है,
बस् तुहि है और कोई नहीँ।
तो आना..? आता क्यों नहीँ ?
मुझ पापिको ले जाना...आ..लेजा ?
तंग आ गया हूँ
इस ज़िन्दगी से
तंग आ गया हूँ
इस बेखुदी से....
नहीँ रहना है तुम्हारे
इस वनावटी दुनियाँ में
नहीँ ज़िना है मुझे
इस दिखावटी दुनियाँ में।
बस् अब और नहीँ.......
अगर तू सच में है,
तो आकर ले ज़ा...
मेरा वज़ूद ..,मेरा अस्तित्व मिटाकर ले ज़ा
में तेरा कर्ज़दार रहूँगा.....
में तेरा शुक्रगुज़ार रहूँगा.....

                              लेखक,
                       अभिजीत आनंद
                      ©अभिजीत चौधरी

खाव्हीशें तो बहौत है ...

खाव्हीशें तो बहौत है जीने कि
मन तो बहौत है कुछ कऱने कि
लेकिन कभी-कभी टूट सा जाता हूँ
बिखर सा जाता हूँ.....
रास्ते तो बहौत हे मंज़िल पर जाने कि
लेकिन ये जो वक़्त है
मुझे जीने नहीँ दे रहा
चाहता हुँ बहोत कुछ करने कि
लेकिन कुछ करने नहीँ दे रहा....
ऐ खुदा !
तुझे क्या कहूँ
अल्लाह कहूँ या भगवान
हिन्द कहूँ या इश्लाम.....
तूम जो भी हो, जहाँ भी हो...
एक हो में जानता हूँ
तेरे अस्तित्व और प्रभूताको में मानता हूँ
लेकिन तुम्हारे बनाये हुवे इन लोगों को तो देखो
में कुछ करना चाहता हूँ
करने नहीँ दे रहा
में ज़िना चाहता हूँ.......
ज़ीने नहीं दे रहा.......
                  
                          लेखक,
                 कुमार अभिजीत आनंद
                  ©अभिजीत चौधरी

हे प्रभु !

हे प्रभु !
क्षमा कs दिय,
अगर हमरा सँ कोनो ग़लती भेल ह्यात त
अगर हमरा स कोनो भूल भेल ह्यात त
हम कोनो लेखक नै छि
हम कोनो शायर नै छि
बस् बून्द शब्द के अबैय जे मनमेँ
लिख़ लिख कs समझबै छि
हम कोनो कवि या कलाकार नै छि।
आहाँ अपन अनुकंपा कहु
या ओकर वियोग
आहाँ हमरा पागल कहु
या समयक संयोग
आहाँ जे कहु, जे समझू
आहाँ के सम्झके अधिकार अछि।
हम लिखै छि कि, सोचै छि कि ??
कि करै छि मालूम नै रहैय,
इ वियोग पीड़ा बस् अंतिम क्षण अछि
इ मनक जवाब कहैय..............
हे प्रभु !

                         लेखक,
                 ©अभिजीत चौधरी
                  अभिजीत आनंद

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

..............विडम्बना................


विडम्बना छल केहन हमर ओ विधाता
मनक बात मनमे रहि गेल
नै बनल नाता,नै बनल रिस्ता
खेल ई केहन खेल जे खेललौं
टूटि क...छुटि गेल
वस....सँ पहिने ओ नाता
विडम्बना छल केहन..............
आकांक्षा बनल छल
आहाँ सँग प्रीत लगाव के
मनक बात कहि
आहाँ सँग मीत लगाव के
विरह, वियोग के संगम द
ई दुनियाँ के झुठा रीत निभेलौं
विडम्बना छल केहन.........
मानलौं अहाँक प्रभुत्व सँ
ई संसार डेराइय,
अहिक अश्तित्व सँ,
ई संसार रचाइय,
दोष कि छल हम तुक्ष के
देलौं किया विरह भेंट अपार
विडम्बना छल केहन............
गीत बनि गबै छि
अहाँक याद के ओ पल्
सरगम बनि थिरकई छि
सोइच क वितल कल
हम ने बुझलौं, हम ने जनलौं
नै समझलौं प्रेमक ओ गाथा
विडम्बना छल केहन........
लेखक
©अभिजीत चौधरी
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

कुछ शब्द

मेरे जुबाँ से निकला हर अल्फाज मेरा हे,
में कोइ शायर तो नही,
लेकिन दो बूंद शब्दके तेरे लिए गुनगुनाता हूं..
वक़्त गुजर गया किसीकी तालाश में,
जव मिली तो पहचानने से इन्कार कर दिया,
हमने तो सिर्फ चंद सवाल हि तो पूछे थे?
उसको वो राश ना आइ...,
क्योंकि वो सिर्फ एक मजाक था
उसका एक झूठा अल्फाज था।
अब इतनी दूर आ चुका हूँ कि,
वापस लौट नही सकता,
जिसको पराया समझा था हमने,
वही..उसिकि याद फिरसे आने लगे हैं.......
मेरे पास कुछ नही है खुदके शिवा,
क्योंकि मेरा पहचान भि......,
किसी और का था.........
                                                                                


                                               लेखक
                                        अभिजीत आनंद
                                       सर्वाधिकार सुरक्षित  

बुधवार, 24 जनवरी 2018

तलाश !

तलाश जारी अछि मंज़िलक पाव के
इंतज़ार जारी अछि ओ रस्ता आजमाव के
नै मिलल त कि करू
इ त भाग-भाग के बात अछि
हम कोशिशो नै करू
इ त गलत बात अछि।
अतेक आशॉन कहाँ अछि,
मंज़िलक ओ संगम के
अतेक पानी कहाँ अछि
प्याश बुझा दै जे मनके......
अपन अंतकरण के समझा कs राखी,
अपन प्याशक मनके बुझा कs राखी
अतेक आशॉन मंज़िलक लक्ष्य नै अछि
अपन मनक चञ्चलता के मना कs राखी।
हे प्रभु!
ई मिथ्यामई संसारक....,
ई भोग विलाशक दुनियाँ सँ दूर,
हमरा भगा दिय
अहाँ अपन प्रभुत्व सँ मिला दिय
बस् एक विनती, एक गुज़ारिश अछि अहाँ स
पलभर के लेल अहाँ अपन अस्तित्व सँ मिला दिय......
हम आहाँक कर्ज़दार रहब.....
हम आहाँक शुक्रगुज़ार रहब.......

   
                                      लेखक,
                               अभिजीत चौधरी
                            "Abhijeet Anand"
                            ©सर्वाधिकार सुरक्षित