रविवार, 4 फ़रवरी 2018

प्रभु ! आपको लगता होगा..

प्रभु!
आपको लगता होगा
में कविता में क्या लिखता रहता हूँ
क्या कहूँ.....…
हर वक़्त आपको...बस् आपको
पैगाम लिखता रहता हूँ....
आप सोचते होंगे तुम पागल तो नहीँ ?
हाँ प्रभु !
में पागल हि तो हूँ,
दुनियाँ का ठोकर खाया हुवा घायल हि तो हूँ.....
आपको पाने के लिए हि
में ये सब बोलता रहता हूँ
आपको रिझाने के लिए हि
में आपको कोशता रहता हूँ.......

                            लेखक,
                  कुमार अभिजीत आनंद
                    ©अभिजीत चौधरी
               

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