हे प्रभु !
क्षमा कs दिय,
अगर हमरा सँ कोनो ग़लती भेल ह्यात त
अगर हमरा स कोनो भूल भेल ह्यात त
हम कोनो लेखक नै छि
हम कोनो शायर नै छि
बस् बून्द शब्द के अबैय जे मनमेँ
लिख़ लिख कs समझबै छि
हम कोनो कवि या कलाकार नै छि।
आहाँ अपन अनुकंपा कहु
या ओकर वियोग
आहाँ हमरा पागल कहु
या समयक संयोग
आहाँ जे कहु, जे समझू
आहाँ के सम्झके अधिकार अछि।
हम लिखै छि कि, सोचै छि कि ??
कि करै छि मालूम नै रहैय,
इ वियोग पीड़ा बस् अंतिम क्षण अछि
इ मनक जवाब कहैय..............
हे प्रभु !
लेखक,
©अभिजीत चौधरी
अभिजीत आनंद
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