बुधवार, 20 जून 2018

ज़िन्दगी


 ज़िन्दगी तुझसे शिकायत नहीं
अजनवी हूँ ,किसीका इनायत नहीं
में खुश हु तेरी इन बनावटों से
चल रहा हूँ इस भीड़ वीरानों में
एक कमी किसीका इमायत नहीं ...
मुझे तेरी ज़िन्दगी से
कभी सिकवा था , ना गिला
बस एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ तुझसे ?
क्या लिखे हो मेरे ज़िन्दगी के ,
वो अंतिम क्षण में ?
खैर ! में ठहरा मामूली इन्शान
मुझसे तुझसे शिकायत नहीं
अन्ज़ान हूँ ...अन्ज़ान ही बना रहूँगा
में खुश हूँ तेरी इन बनावटों से
चल रहा हूँ .........
                                                                              कुमार अभिजीत आनंद 

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