बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

मुझे पता है एक दिन...

मुझे पता है एक दिन समझ जाओगे
क्या होता है दुत्कारना
जब बितेगा तुम पर
आशा है , तुम भी संभल जाओगे....
कहते हैं लोग चाँद इतना खूबसूरत क्यों है ?
इतना खूबसूरत होने के बाद भी
उसमे दाग़ क्यों है...?
मुझे नही पता ये सब
में तो बस् इतना जानता हूँ की
चाँद में दाग़ है फिर भी
लोग उसी को चाहते हैं
उसीको झुक के शज़दा करते हैं
उशी से प्यार करते हैं....
तुम्हारी ये दुत्कार को भि क़द्र किया है मैंने
इतना कुछ होंने के वावजूद भी शब्र किया है मैंने
अब मुझे नही पता कि ये सब क्यों कर रहा हूँ
किस लिए कर रहा हूँ
ज़िंदा लाश हुँ , क्यों हूँ नहीँ पता
पर इतना ज़रूर जनता हूँ ...
खुद को ईश ज़मीं पर किशि के लिये...
कब्र किया है मैने.....…
                                   लेखक,
                       ©कुमार अभिजीत आनंद

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