तलाश जारी अछि मंज़िलक पाव के
इंतज़ार जारी अछि ओ रस्ता आजमाव के
नै मिलल त कि करू
इ त भाग-भाग के बात अछि
हम कोशिशो नै करू
इ त गलत बात अछि।
अतेक आशॉन कहाँ अछि,
मंज़िलक ओ संगम के
अतेक पानी कहाँ अछि
प्याश बुझा दै जे मनके......
अपन अंतकरण के समझा कs राखी,
अपन प्याशक मनके बुझा कs राखी
अतेक आशॉन मंज़िलक लक्ष्य नै अछि
अपन मनक चञ्चलता के मना कs राखी।
हे प्रभु!
ई मिथ्यामई संसारक....,
ई भोग विलाशक दुनियाँ सँ दूर,
हमरा भगा दिय
अहाँ अपन प्रभुत्व सँ मिला दिय
बस् एक विनती, एक गुज़ारिश अछि अहाँ स
पलभर के लेल अहाँ अपन अस्तित्व सँ मिला दिय......
हम आहाँक कर्ज़दार रहब.....
हम आहाँक शुक्रगुज़ार रहब.......
लेखक,
अभिजीत चौधरी
"Abhijeet Anand"
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