ई धनो अहाँके
ई वैभवो अहाँके
ई सारा संसारक ख़ुशी
सब किछ अहाँके
बस् एक वीनती अछि अहाँ स
बस् एक गुजारिश अछि अहाँ स
पलभरके सुकून लौटा दिय
भोग विलाशक दुनियाँ स दूर
हमरा अपन प्रभुत्व स मिला दिय।
हम अहाँक कर्जदार रहब
हम अहाँक शुक्रगुज़ार रहब
ई विभेदक दुनियाँ स दूर
हमरा पर अपन अशीम कृपा दिखा दिय।
हमरा पर अपन........
हम जनै छि,
अहाँ किया कतराई छि
हम जनै छि अहाँ किया घबराइ छि
अपन अशीम कृपा देब सँ,
अहाँ किया डेराइ छि।
मानलौं हम अहाँक कृपाक भागी नै छि
मानलौं हम आहाँक अनुकम्पाक भागी नै छि
तैयो,
संतान समैझ क्षमा क दिय
हमरा पर अपन कृपा बर्षा दिय....
पलभर के सुकून ,
भोग विलाशक दुनियाँ स दूर
हमरा अपन प्रभुत्व स मिला दिय
हम अहाँक कर्जदार रहब....
हम आहाँक शुक्रगुज़ार........
लेखक
अभिजीत चौधरी
©सुरछित
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